छत्तीसगढ़
भोरमदेव अभ्यारण्य में शुरू होगी जंगल सफारी, ईको-टूरिज्म को मिलेगी नई उड़ान
Shantanu Roy
4 Feb 2026 10:54 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नई दिशा की ओर अग्रसर हो रहा है। इसी कड़ी में कबीरधाम जिले के ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भोरमदेव अभ्यारण्य में शीघ्र ही पर्यटकों के लिए जंगल सफारी की शुरुआत की जा रही है। इस पहल से न केवल राज्य में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आमजन में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता भी विकसित होगी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डे के मार्गदर्शन में इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम रूप दिया गया है। इसके तहत लगभग 34 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी रूट विकसित किया गया है, जो अभ्यारण्य के सघन और जैव विविधता से भरपूर वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। सफारी के दौरान पर्यटकों को गौर, चीतल, सांभर, भालू और जंगली सुअर जैसे वन्यप्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा। इस जंगल सफारी की सबसे बड़ी विशेषता सकरी नदी मार्ग है, जहां सफारी वाहन को लगभग 17 बार नदी पार करनी होगी।
यह रोमांचक अनुभव पर्यटकों के लिए साहसिक पर्यटन का अनूठा उदाहरण बनेगा। सफारी मार्ग मैकल पर्वतमाला के घने वनों से होकर गुजरता है, जहां प्रकृति की सुंदरता, हरियाली और जैव विविधता पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देगी। यह सफारी न केवल रोमांच बल्कि प्रकृति के साथ आत्मीय जुड़ाव का अनुभव भी प्रदान करेगी। वन विभाग द्वारा इस परियोजना में स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सफारी वाहनों का संचालन वन प्रबंधन समिति थंवरझोल द्वारा किया जाएगा, जिससे आसपास के ग्रामीणों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीणों में वन संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी। वन विभाग द्वारा सफारी के सुरक्षित, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल संचालन के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। प्रशिक्षित वाहन चालक, सुरक्षा मानक, पर्यटकों के लिए दिशा-निर्देश और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की जा रही है। जंगल सफारी के प्रारंभ होने से अब भोरमदेव आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहे जाने वाले भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक दर्शन के साथ-साथ वन्य जीवन के रोमांचक अनुभव का भी आनंद ले सकेंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ को ईको-टूरिज्म के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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